सेना सिर्फ रास्ट्रीय होगा और जैसा की हम जानते है सेना में मधेशी का भागेदारी नगण्य है.
प्रसाशन, निति निर्माता और सरकारी नौकरी में मधेशी का प्रदिनिधित्व बहुत कम है जो है भी वो निचले ओहदे के है.
जनसँख्या के आधार पर संशादिया क्षेत्र नहीं होने से मधेशी का जनसँख्या क्यों न ५०% से जादा हो पर ५०% का पावर मिलना बहुत ही दूर की बात है.पहाड़ के कई गामो का जनशंख्या होता है ५०० और मधेश के गामो की जनशंख्या १५-२५,००० और बजेट उतना ही. हर एक जगह असमानता कब तक चलेगा.मधेशी का नागरिकता का समाश्या अभी तक बना हुवा है. नेपाली चाहे इंडिया के क्यों न हो उसे नागरिकता मिल जाता है और अभी भी हमारे हजारो मधेशी भाई बहन को इंडियन बोल कर नागरिकता नहीं दिया जाता है.
मधेश का दो चार सहर को छोड़ दे तो मधेश में बहुत कम औधोगिक बिकाश हुवा है. अगर मधेश अखंड रहे तो आर्थिक रूप से मधेश को मजबूत बनाने में सहजता होगी.
मधेश को अगर टुकरा कर दिया जाता है तो नेपाल सरकार जिस तरह अभी मधेशी पार्टी को तोंर फॉर से फ़ायदा उठाती है ठीक उशी तरह राज्यों के साथ भी फ़ायदा उठाएगी. हम अपने अधिकार के लिए नेपाल सरकार पर समग्र मधेश के वजह से जो दबाब बनाते है मधेश को टुकरा होने पर उस तरह का दबाब बनाना मुस्किल होगा. अगर मधेश तोरा गया तो किसी राज्य को अपना कर किसी दुसरे राज्य के साथ दमन किया जाएगा या मधेशी का उचित अधिकार के साथ खिलबार किया जाएगा. नेपाल सरकार डरती है की अगर मधेश अखंड रहा तो आज न कल मधेशी का संपूर्ण अधिकार देना ही परेगा.
ऊपर दिए गए बिचार मेरा ब्याक्तिगत है आप लोगो का बिचार अलग हो सकता है. आप लोग अपना बिचार भी शेयर करे ......जय मधेश.
We need a single Madhesh comprised of 22 Districts to avoid Imperialism over it. United we stand, divided we fall-a simple formula is indeed applied in case of Madhesh as well. So, there is no doubt that to make a Happy & Prosperious Madhesh, we need single Madhesh, full Terai region of Nepal..
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