एक शायरी:
बड़ी मुदत से चाहा है "मधेश को"
बड़ी दुवावो के बाद हमने पाया है "मधेश को"
"मधेश को" भुलाने की हम सोच भी नहीं सकते
हमने किस्मत की लकीरों से चुराया है "मधेश को"
.....................जय मधेश और मधेश जिंदाबाद ......
बड़ी मुदत से चाहा है "मधेश को"
बड़ी दुवावो के बाद हमने पाया है "मधेश को"
"मधेश को" भुलाने की हम सोच भी नहीं सकते
हमने किस्मत की लकीरों से चुराया है "मधेश को"
.....................जय मधेश और मधेश जिंदाबाद ......
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